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सहीह बुख़ारी

नंबर 6372

नंबर 6372किताब 80, नंबर 69
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ اللَّهُمَّ حَبِّبْ إِلَيْنَا الْمَدِينَةَ، كَمَا حَبَّبْتَ إِلَيْنَا مَكَّةَ أَوْ أَشَدَّ، وَانْقُلْ حُمَّاهَا إِلَى الْجُحْفَةِ، اللَّهُمَّ بَارِكْ لَنَا فِي مُدِّنَا وَصَاعِنَا ‏"‏‏.‏
Narrated `Aisha:The Prophet (ﷺ) said, "O Allah! Make us love Medina as You made us love Mecca, or more, and transfer the fever that is in it, to Al-Juhfa. O Allah! Bless our Mudd and our Sam' (kinds of measures)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 80 · Invocations

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।