सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 6366

नंबर 6366किताब 80, नंबर 63
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ أَبِي وَائِلٍ، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ دَخَلَتْ عَلَىَّ عَجُوزَانِ مِنْ عُجُزِ يَهُودِ الْمَدِينَةِ فَقَالَتَا لِي إِنَّ أَهْلَ الْقُبُورِ يُعَذَّبُونَ فِي قُبُورِهِمْ، فَكَذَّبْتُهُمَا، وَلَمْ أُنْعِمْ أَنْ أُصَدِّقَهُمَا، فَخَرَجَتَا وَدَخَلَ عَلَىَّ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَقُلْتُ لَهُ يَا رَسُولَ اللَّهِ إِنَّ عَجُوزَيْنِ وَذَكَرْتُ لَهُ، فَقَالَ ‏ "‏ صَدَقَتَا، إِنَّهُمْ يُعَذَّبُونَ عَذَابًا تَسْمَعُهُ الْبَهَائِمُ كُلُّهَا ‏"‏‏.‏ فَمَا رَأَيْتُهُ بَعْدُ فِي صَلاَةٍ إِلاَّ تَعَوَّذَ مِنْ عَذَابِ الْقَبْرِ‏.‏
आइशा -रज़ियल्लाहु अन्हा- कहती हैं कि मेरे पास मदीने की दो बूढ़ी यहूदी महिलाएं आईं और मुझसे कहने लगीं कि क़ब्र वालों को उनकी क़ब्रों में अज़ाब दिया जाता है। मैंने दोनों को झुठला दिया और उनकी पुष्टि न कर सकी। दोनों चली भी गईं। फिर नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- मेरे पास आए, तो मैंने कहाः ऐ अल्लाह के रसूल, दो बूढ़ियाँ मेरे पास आईं थीं। मैंने आपको पूरी घटना सुना दी। आपने फ़रमायाः "दोनों ने सच कहा है। लोगों को ऐसा अज़ाब दिया जाता है कि सारे चौपाए उसे सुनते हैं।" इसके बाद मैंने देखा कि आप हर नमाज़ में क़ब्र के अज़ाब से अल्लाह की पनाह माँगा करते थे।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 80 · Invocations

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।