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सहीह बुख़ारी

नंबर 6358

नंबर 6358किताब 80, नंबर 55
حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ حَمْزَةَ، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي حَازِمٍ، وَالدَّرَاوَرْدِيُّ، عَنْ يَزِيدَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ خَبَّابٍ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، قَالَ قُلْنَا يَا رَسُولَ اللَّهِ هَذَا السَّلاَمُ عَلَيْكَ، فَكَيْفَ نُصَلِّي قَالَ ‏ "‏ قُولُوا اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى مُحَمَّدٍ عَبْدِكَ وَرَسُولِكَ، كَمَا صَلَّيْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ، وَبَارِكْ عَلَى مُحَمَّدٍ وَعَلَى آلِ مُحَمَّدٍ، كَمَا بَارَكْتَ عَلَى إِبْرَاهِيمَ وَآلِ إِبْرَاهِيمَ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Sa`id Al-Khudri:We said, "O Allah's Messenger (ﷺ) This is (i.e. we know) the greeting to you; will you tell us how to send Salat on you?" He said, "Say: 'Allahumma Salli 'ala Muhammadin `Abdika wa rasulika kama sal-laita 'ala Ibrahima wa barik 'ala Muhammadin wa all Muhammadin kama barakta 'ala Ibrahima wa `Ali Ibrahim

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 80 · Invocations

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।