सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 6346

नंबर 6346किताब 80, नंबर 43
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ هِشَامِ بْنِ أَبِي عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَبِي الْعَالِيَةِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَقُولُ عِنْدَ الْكَرْبِ ‏ "‏ لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ الْعَظِيمُ الْحَلِيمُ، لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ رَبُّ الْعَرْشِ الْعَظِيمِ، لاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ رَبُّ السَّمَوَاتِ، وَرَبُّ الأَرْضِ، وَرَبُّ الْعَرْشِ الْكَرِيمِ ‏"‏‏.‏ وَقَالَ وَهْبٌ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ عَنْ قَتَادَةَ مِثْلَهُ‏.‏
Narrated Ibn `Abbas:Allah's Messenger (ﷺ) used to say at a time of distress, "La ilaha illal-lahu Rabbul-l-'arsh il-'azim, La ilaha illallahu Rabbu-s-samawati wa Rabbu-l-ard, Rabbu-l-'arsh-il-Karim

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 80 · Invocations

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।