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सहीह बुख़ारी

नंबर 6343

नंबर 6343किताब 80, नंबर 40
حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا وُهَيْبٌ، حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ يَحْيَى، عَنْ عَبَّادِ بْنِ تَمِيمٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ زَيْدٍ، قَالَ خَرَجَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِلَى هَذَا الْمُصَلَّى يَسْتَسْقِي، فَدَعَا وَاسْتَسْقَى ثُمَّ اسْتَقْبَلَ الْقِبْلَةَ وَقَلَبَ رِدَاءَهُ‏.‏
Narrated `Abdullah bin Zaid:Allah's Messenger (ﷺ) went out to this Musalla (praying place) to offer the prayer of Istisqa.' He invoked Allah for rain and then faced the Qibla and turned his Rida' (upper garment) inside out

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 80 · Invocations

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।