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सहीह बुख़ारी

नंबर 6338

नंबर 6338किताब 80, नंबर 35
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ، عَنْ أَنَسٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِذَا دَعَا أَحَدُكُمْ فَلْيَعْزِمِ الْمَسْأَلَةَ، وَلاَ يَقُولَنَّ اللَّهُمَّ إِنْ شِئْتَ فَأَعْطِنِي‏.‏ فَإِنَّهُ لاَ مُسْتَكْرِهَ لَهُ ‏"‏‏.‏
Narrated Anas:Allah's Messenger (ﷺ) said, "When anyone of you appeal to Allah for something, he should ask with determination and should not say, 'O Allah, if You wish, give me.', for nobody can force Allah to do something against His Will

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 80 · Invocations

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।