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सहीह बुख़ारी

नंबर 6335

नंबर 6335किताब 80, नंबर 32
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدَةُ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ سَمِعَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم رَجُلاً يَقْرَأُ فِي الْمَسْجِدِ فَقَالَ ‏ "‏ رَحِمَهُ اللَّهُ، لَقَدْ أَذْكَرَنِي كَذَا وَكَذَا آيَةً أَسْقَطْتُهَا فِي سُورَةِ كَذَا وَكَذَا ‏"‏‏.‏
Narrated `Aisha:The Prophet (ﷺ) heard a man reciting (the Qur'an) in the mosque. He said," May Allah bestow His Mercy on him, as he made me remember such and-such Verse which I had missed in such-and-such Sura

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 80 · Invocations

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।