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सहीह बुख़ारी

नंबर 6332

नंबर 6332किताब 80, नंबर 29
حَدَّثَنَا مُسْلِمٌ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَمْرٍو، سَمِعْتُ ابْنَ أَبِي أَوْفَى ـ رضى الله عنهما كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا أَتَاهُ رَجُلٌ بِصَدَقَةٍ قَالَ ‏"‏ اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى آلِ فُلاَنٍ ‏"‏‏.‏ فَأَتَاهُ أَبِي فَقَالَ ‏"‏ اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَى آلِ أَبِي أَوْفَى ‏"‏‏.‏
Narrated Ibn Abi `Aufa:Whenever a man brought his alms to the Prophet, the Prophet (ﷺ) would say, "O Allah! Bestow Your Blessing upon the family of so-and-so." When my father came to him (with his alms), he said, "O Allah! Bestow Your Blessings upon the family of Abi `Aufa

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 80 · Invocations

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।