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सहीह बुख़ारी

नंबर 6312

नंबर 6312किताब 80, नंबर 9
حَدَّثَنَا قَبِيصَةُ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ، عَنْ رِبْعِيِّ بْنِ حِرَاشٍ، عَنْ حُذَيْفَةَ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا أَوَى إِلَى فِرَاشِهِ قَالَ ‏"‏ بِاسْمِكَ أَمُوتُ وَأَحْيَا ‏"‏‏.‏ وَإِذَا قَامَ قَالَ ‏"‏ الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا وَإِلَيْهِ النُّشُورُ ‏"‏‏.‏ تُنْشِرُهَا: تُخْرِجُهَا
Narrated Hudhaifa:When the Prophet (ﷺ) went to bed, he would say: "Bismika amutu wa ahya." and when he got up he would say:" Al-hamdu li l-lahil-ladhi ahyana ba'da ma amatana wa ilaihin-nushur

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 80 · Invocations

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।