حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ، قَالَ حَدَّثَنَا الْقَاسِمُ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ بِئْسَمَا عَدَلْتُمُونَا بِالْكَلْبِ وَالْحِمَارِ، لَقَدْ رَأَيْتُنِي وَرَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي، وَأَنَا مُضْطَجِعَةٌ بَيْنَهُ وَبَيْنَ الْقِبْلَةِ، فَإِذَا أَرَادَ أَنْ يَسْجُدَ غَمَزَ رِجْلَىَّ فَقَبَضْتُهُمَا.
Narrated `Aisha:It is not good that you people have made us (women) equal to dogs and donkeys. No doubt I saw Allah's Messenger (ﷺ) praying while I used to lie between him and the Qibla and when he wanted to prostrate, he pushed my legs and I withdrew them
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।