सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 464

नंबर 464किताब 8, नंबर 112
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ، قَالَ أَخْبَرَنَا مَالِكٌ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ نَوْفَلٍ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ زَيْنَبَ بِنْتِ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ، قَالَتْ شَكَوْتُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنِّي أَشْتَكِي‏.‏ قَالَ ‏ "‏ طُوفِي مِنْ وَرَاءِ النَّاسِ وَأَنْتِ رَاكِبَةٌ ‏"‏‏.‏ فَطُفْتُ وَرَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي إِلَى جَنْبِ الْبَيْتِ، يَقْرَأُ بِالطُّورِ وَكِتَابٍ مَسْطُورٍ‏.‏
Narrated Um Salama:I complained to Allah's Messenger (ﷺ) that I was sick. He told me to perform the Tawaf behind the people while riding. So I did so and Allah's Messenger (ﷺ) was praying beside the Ka`ba and reciting the Sura starting with "Wat-tur wa kitabin mastur

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 8 · Prayers (Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।