حَدَّثَنَا خَلاَّدُ بْنُ يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنَا مِسْعَرٌ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَارِبُ بْنُ دِثَارٍ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ أَتَيْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم وَهُوَ فِي الْمَسْجِدِ ـ قَالَ مِسْعَرٌ أُرَاهُ قَالَ ضُحًى ـ فَقَالَ " صَلِّ رَكْعَتَيْنِ ". وَكَانَ لِي عَلَيْهِ دَيْنٌ فَقَضَانِي وَزَادَنِي.
Narrated Jabir bin `Abdullah:I went to the Prophet (ﷺ) in the mosque (the sub-narrator Mis`ar thought that Jabir had said, "In the forenoon.") He ordered me to pray two rak`at. He owed me some money and he repaid it to me and gave more than what was due to me
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।