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सहीह बुख़ारी

नंबर 372

नंबर 372किताब 8, नंबर 24
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ، قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، قَالَ أَخْبَرَنِي عُرْوَةُ، أَنَّ عَائِشَةَ، قَالَتْ لَقَدْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي الْفَجْرَ، فَيَشْهَدُ مَعَهُ نِسَاءٌ مِنَ الْمُؤْمِنَاتِ مُتَلَفِّعَاتٍ فِي مُرُوطِهِنَّ ثُمَّ يَرْجِعْنَ إِلَى بُيُوتِهِنَّ مَا يَعْرِفُهُنَّ أَحَدٌ‏.‏
Narrated `Aisha:Allah's Messenger (ﷺ) used to offer the Fajr prayer and some believing women covered with their veiling sheets used to attend the Fajr prayer with him and then they would return to their homes unrecognized

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 8 · Prayers (Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।