حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامٌ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ عُمَرَ بْنِ أَبِي سَلَمَةَ، أَنَّهُ رَأَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي فِي ثَوْبٍ وَاحِدٍ فِي بَيْتِ أُمِّ سَلَمَةَ، قَدْ أَلْقَى طَرَفَيْهِ عَلَى عَاتِقَيْهِ.
Narrated `Umar bin Abi Salama:I saw the Prophet (ﷺ) offering prayers in a single garment in the house of Um-Salama and he had crossed its ends around his shoulders
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।