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सहीह बुख़ारी

नंबर 350

नंबर 350किताब 8, नंबर 2
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ، قَالَ أَخْبَرَنَا مَالِكٌ، عَنْ صَالِحِ بْنِ كَيْسَانَ، عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ، عَنْ عَائِشَةَ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ، قَالَتْ ‏ "‏ فَرَضَ اللَّهُ الصَّلاَةَ حِينَ فَرَضَهَا رَكْعَتَيْنِ رَكْعَتَيْنِ فِي الْحَضَرِ وَالسَّفَرِ، فَأُقِرَّتْ صَلاَةُ السَّفَرِ، وَزِيدَ فِي صَلاَةِ الْحَضَرِ ‏"‏‏.‏
Narrated `Aisha:the mother of believers: Allah enjoined the prayer and when He enjoined it, it was two rak`at only (in every prayer) both when in residence or on journey. Then the prayers offered on journey remained the same, but (the rak`at of) the prayers for non-travelers were increased

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 8 · Prayers (Salat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।