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सहीह बुख़ारी

नंबर 6250

नंबर 6250किताब 79, नंबर 24
حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ، هِشَامُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ الْمُنْكَدِرِ، قَالَ سَمِعْتُ جَابِرًا ـ رضى الله عنه ـ يَقُولُ أَتَيْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فِي دَيْنٍ كَانَ عَلَى أَبِي فَدَقَقْتُ الْبَابَ فَقَالَ ‏"‏ مَنْ ذَا ‏"‏‏.‏ فَقُلْتُ أَنَا‏.‏ فَقَالَ ‏"‏ أَنَا أَنَا ‏"‏‏.‏ كَأَنَّهُ كَرِهَهَا‏.‏
Narrated Jabir:I came to the Prophet (ﷺ) in order to consult him regarding my father's debt. When I knocked on the door, he asked, "Who is that?" I replied, "I" He said, "I, I?" He repeated it as if he disliked it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 79 · Asking Permission

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।