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सहीह बुख़ारी

नंबर 6244

नंबर 6244किताब 79, नंबर 18
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا ثُمَامَةُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَنَسٍ ـ رضى الله عنه أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ إِذَا سَلَّمَ سَلَّمَ ثَلاَثًا، وَإِذَا تَكَلَّمَ بِكَلِمَةٍ أَعَادَهَا ثَلاَثًا‏.‏
Narrated Anas:Whenever Allah's Messenger (ﷺ) greeted somebody, he used to greet him three times, and if he spoke a sentence, he used to repeat it thrice

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 79 · Asking Permission

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।