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सहीह बुख़ारी

नंबर 6182

नंबर 6182किताब 78, नंबर 206
حَدَّثَنَا عَيَّاشُ بْنُ الْوَلِيدِ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الأَعْلَى، حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ تُسَمُّوا الْعِنَبَ الْكَرْمَ، وَلاَ تَقُولُوا خَيْبَةَ الدَّهْرِ‏.‏ فَإِنَّ اللَّهَ هُوَ الدَّهْرُ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira:The Prophet (ﷺ) said, "Don't call the grapes Al-Karm, and don't say 'Khaibat-ad-Dahri, for Allah is the Dahr. (See Hadith No)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 78 · Good Manners and Form (Al-Adab)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।