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सहीह बुख़ारी

नंबर 6180

नंबर 6180किताब 78, नंबर 204
حَدَّثَنَا عَبْدَانُ، أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ، عَنْ يُونُسَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ أَبِي أُمَامَةَ بْنِ سَهْلٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ لاَ يَقُولَنَّ أَحَدُكُمْ خَبُثَتْ نَفْسِي، وَلَكِنْ لِيَقُلْ لَقِسَتْ نَفْسِي ‏"‏‏.‏ تَابَعَهُ عُقَيْلٌ‏.‏
Narrated Sal:The Prophet (ﷺ) said, "None of you should say Khabuthat Nafsi but he is recommended to say 'Laqisat Nafsi (See Hadith No)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 78 · Good Manners and Form (Al-Adab)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।