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सहीह बुख़ारी

नंबर 6172

नंबर 6172किताब 78, नंबर 198
حَدَّثَنَا أَبُو الْوَلِيدِ، حَدَّثَنَا سَلْمُ بْنُ زَرِيرٍ، سَمِعْتُ أَبَا رَجَاءٍ، سَمِعْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لاِبْنِ صَائِدٍ ‏"‏ قَدْ خَبَأْتُ لَكَ خَبِيئًا فَمَا هُوَ ‏"‏‏.‏ قَالَ الدُّخُّ‏.‏ قَالَ ‏"‏ اخْسَأْ ‏"‏‏.‏
Narrated Ibn `Abbas:Allah's Messenger (ﷺ) said to Ibn Saiyad "I have hidden something for you in my mind; What is it?" He said, "Ad-Dukh." The Prophet (ﷺ) said, "Ikhsa

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 78 · Good Manners and Form (Al-Adab)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।