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सहीह बुख़ारी

नंबर 6169

नंबर 6169किताब 78, नंबर 195
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي وَائِلٍ، قَالَ قَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مَسْعُودٍ ـ رضى الله عنه جَاءَ رَجُلٌ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ كَيْفَ تَقُولُ فِي رَجُلٍ أَحَبَّ قَوْمًا وَلَمْ يَلْحَقْ بِهِمْ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ الْمَرْءُ مَعَ مَنْ أَحَبَّ ‏"‏‏.‏ تَابَعَهُ جَرِيرُ بْنُ حَازِمٍ وَسُلَيْمَانُ بْنُ قَرْمٍ وَأَبُو عَوَانَةَ عَنِ الأَعْمَشِ عَنْ أَبِي وَائِلٍ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated `Abdullah bin Mas`ud:A man came to Allah's Messenger (ﷺ) and said, "O Allah's Messenger (ﷺ)! What do you say about a man who loves some people but cannot catch up with their good deeds?" Allah's Messenger (ﷺ) said, "Everyone will be with those whom he loves

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 78 · Good Manners and Form (Al-Adab)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।