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सहीह बुख़ारी

नंबर 6166

नंबर 6166किताब 78, नंबर 192
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الْوَهَّابِ، حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ الْحَارِثِ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ وَاقِدِ بْنِ مُحَمَّدِ بْنِ زَيْدٍ، سَمِعْتُ أَبِي، عَنِ ابْنِ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ وَيْلَكُمْ ـ أَوْ وَيْحَكُمْ قَالَ شُعْبَةُ شَكَّ هُوَ ـ لاَ تَرْجِعُوا بَعْدِي كُفَّارًا، يَضْرِبُ بَعْضُكُمْ رِقَابَ بَعْضٍ ‏"‏‏.‏ وَقَالَ النَّضْرُ عَنْ شُعْبَةَ وَيْحَكُمْ‏.‏ وَقَالَ عُمَرُ بْنُ مُحَمَّدٍ عَنْ أَبِيهِ وَيْلَكُمْ أَوْ وَيْحَكُمْ‏.‏
Narrated Ibn `Umar:The Prophet (ﷺ) said, "Wailakum" (woe to you) or "waihakum" (May Allah be merciful to you)." Shu`ba is not sure as to which was the right word. "Do not become disbelievers after me by cutting the necks of one another

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 78 · Good Manners and Form (Al-Adab)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।