حَدَّثَنَا ابْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ مَهْدِيٍّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ، حَدَّثَنَا أَبُو سَلَمَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم " أَصْدَقُ كَلِمَةٍ قَالَهَا الشَّاعِرُ كَلِمَةُ لَبِيدٍ أَلاَ كُلُّ شَىْءٍ مَا خَلاَ اللَّهَ بَاطِلُ ". وَكَادَ أُمَيَّةُ بْنُ أَبِي الصَّلْتِ أَنْ يُسْلِمَ.
Narrated Abu Huraira:The Prophet (ﷺ) said, "The most true words said by a poet were the words of Labid. He said, i.e. 'Verily, everything except Allah is perishable and Umaiya bin Abi As-Salt was about to embrace Islam
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।