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सहीह बुख़ारी

नंबर 6046

नंबर 6046किताब 78, नंबर 76
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سِنَانٍ، حَدَّثَنَا فُلَيْحُ بْنُ سُلَيْمَانَ، حَدَّثَنَا هِلاَلُ بْنُ عَلِيٍّ، عَنْ أَنَسٍ، قَالَ لَمْ يَكُنْ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَاحِشًا وَلاَ لَعَّانًا وَلاَ سَبَّابًا، كَانَ يَقُولُ عِنْدَ الْمَعْتَبَةِ ‏ "‏ مَا لَهُ، تَرِبَ جَبِينُهُ ‏"‏‏.‏
Narrated Anas:Allah's Messenger (ﷺ) was neither a Fahish (one who had a bad tongue) nor a Sabbaba (one who abuses others) and he used to say while admonishing somebody, "What is wrong with him? May dust be on his forehead

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 78 · Good Manners and Form (Al-Adab)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।