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सहीह बुख़ारी

नंबर 6035

नंबर 6035किताब 78, नंबर 65
حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ حَفْصٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، قَالَ حَدَّثَنِي شَقِيقٌ، عَنْ مَسْرُوقٍ، قَالَ كُنَّا جُلُوسًا مَعَ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو يُحَدِّثُنَا إِذْ قَالَ لَمْ يَكُنْ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَاحِشًا وَلاَ مُتَفَحِّشًا، وَإِنَّهُ كَانَ يَقُولُ ‏ "‏ إِنَّ خِيَارَكُمْ أَحَاسِنُكُمْ أَخْلاَقًا ‏"‏‏.‏
Narrated Masruq:We were sitting with `Abdullah bin `Amr who was narrating to us (Hadith): He said, "Allah's Messenger (ﷺ) was neither a Fahish nor a Mutafahhish, and he used to say, 'The best among you are the best in character (having good manners)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 78 · Good Manners and Form (Al-Adab)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।