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सहीह बुख़ारी

नंबर 6005

नंबर 6005किताब 78, नंबर 36
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَبْدِ الْوَهَّابِ، قَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ أَبِي حَازِمٍ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي قَالَ، سَمِعْتُ سَهْلَ بْنَ سَعْدٍ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ أَنَا وَكَافِلُ الْيَتِيمِ، فِي الْجَنَّةِ هَكَذَا ‏"‏‏.‏ وَقَالَ بِإِصْبَعَيْهِ السَّبَّابَةِ وَالْوُسْطَى‏.‏
Narrated Sahl bin Sa`d:The Prophet (ﷺ) said, "I and the person who looks after an orphan and provides for him, will be in Paradise like this," putting his index and middle fingers together

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 78 · Good Manners and Form (Al-Adab)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।