حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا مَهْدِيٌّ، حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي يَعْقُوبَ، عَنِ ابْنِ أَبِي نُعْمٍ، قَالَ كُنْتُ شَاهِدًا لاِبْنِ عُمَرَ وَسَأَلَهُ رَجُلٌ عَنْ دَمِ الْبَعُوضِ. فَقَالَ مِمَّنْ أَنْتَ فَقَالَ مِنْ أَهْلِ الْعِرَاقِ. قَالَ انْظُرُوا إِلَى هَذَا، يَسْأَلُنِي عَنْ دَمِ الْبَعُوضِ وَقَدْ قَتَلُوا ابْنَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم وَسَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ " هُمَا رَيْحَانَتَاىَ مِنَ الدُّنْيَا ".
इब्न अबू नुअम कहते हैं कि मैं अब्दुल्लाह बिन उमर -रज़ियल्लाहु अन्हुमा- के पास उपस्थित था। एक व्यक्ति ने उनसे मच्छर को मारने के बारे में पूछ लिया, तो अब्दुल्लाह -रज़ियल्लाहु अंहु- ने उससे कहाः तुम कहाँ के रहने वाले हो? उसने कहाः इराक़ का। फ़रमायाः इसे देखो, मुझसे मच्छर को मारने के बारे में पूछ रहा है, जबकि इन्हीं लोगों ने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के नवासे का वध किया है। हालाँकि कि ख़ुद मैंने नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- को कहते सुना हैः "हसन और हुसैन दोनों दुनिया में मेरे पुष्प हैं।"
जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।