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सहीह बुख़ारी

नंबर 5944.2

नंबर 5944.2किताब 77, नंबर 160
حَدَّثَنِي ابْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ مَهْدِيٍّ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ ذَكَرْتُ لِعَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَابِسٍ حَدِيثَ مَنْصُورٍ عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَلْقَمَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ،، فَقَالَ سَمِعْتُهُ مِنْ أُمِّ يَعْقُوبَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ، مِثْلَ حَدِيثِ مَنْصُورٍ‏.‏
Narrated `Abdullah:(As above)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 77 · Dress

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।