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सहीह बुख़ारी

नंबर 5835

नंबर 5835किताब 77, नंबर 52
حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ عُمَرَ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ الْمُبَارَكِ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حِطَّانَ، قَالَ سَأَلْتُ عَائِشَةَ عَنِ الْحَرِيرِ، فَقَالَتِ ائْتِ ابْنَ عَبَّاسٍ فَسَلْهُ‏.‏ قَالَ فَسَأَلْتُهُ فَقَالَ سَلِ ابْنَ عُمَرَ‏.‏ قَالَ فَسَأَلْتُ ابْنَ عُمَرَ فَقَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو حَفْصٍ ـ يَعْنِي عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ ـ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّمَا يَلْبَسُ الْحَرِيرَ فِي الدُّنْيَا مَنْ لاَ خَلاَقَ لَهُ فِي الآخِرَةِ ‏"‏‏.‏ فَقُلْتُ صَدَقَ وَمَا كَذَبَ أَبُو حَفْصٍ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم‏.‏ وَقَالَ عَبْدُ اللَّهِ بْنُ رَجَاءٍ حَدَّثَنَا حَرْبٌ عَنْ يَحْيَى حَدَّثَنِي عِمْرَانُ‏.‏ وَقَصَّ الْحَدِيثَ‏.‏
Narrated 'Umar bin Al-Khattab (ra):Allah's Messenger (ﷺ) said, "None wears silk in this world, but he who will have no share in the Hereafter

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 77 · Dress

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।