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सहीह बुख़ारी

नंबर 5743

नंबर 5743किताब 76, नंबर 58
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، حَدَّثَنِي سُلَيْمَانُ، عَنْ مُسْلِمٍ، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يُعَوِّذُ بَعْضَ أَهْلِهِ، يَمْسَحُ بِيَدِهِ الْيُمْنَى وَيَقُولُ ‏ "‏ اللَّهُمَّ رَبَّ النَّاسِ أَذْهِبِ الْبَاسَ، اشْفِهِ وَأَنْتَ الشَّافِي، لاَ شِفَاءَ إِلاَّ شِفَاؤُكَ، شِفَاءً لاَ يُغَادِرُ سَقَمًا ‏"‏‏.‏ قَالَ سُفْيَانُ حَدَّثْتُ بِهِ مَنْصُورًا فَحَدَّثَنِي عَنْ إِبْرَاهِيمَ عَنْ مَسْرُوقٍ عَنْ عَائِشَةَ نَحْوَهُ‏.‏
Narrated `Aisha:The Prophet (ﷺ) used to treat some of his wives by passing his right hand over the place of ailment and used to say, "O Allah, the Lord of the people! Remove the trouble and heal the patient, for You are the Healer. No healing is of any avail but Yours; healing that will leave behind no ailment

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 76 · Medicine

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।