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सहीह बुख़ारी

नंबर 5730

नंबर 5730किताब 76, नंबर 45
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ، أَخْبَرَنَا مَالِكٌ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَامِرٍ، أَنَّ عُمَرَ، خَرَجَ إِلَى الشَّأْمِ، فَلَمَّا كَانَ بِسَرْغَ بَلَغَهُ أَنَّ الْوَبَاءَ قَدْ وَقَعَ بِالشَّأْمِ، فَأَخْبَرَهُ عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ عَوْفٍ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِذَا سَمِعْتُمْ بِهِ بِأَرْضٍ فَلاَ تَقْدَمُوا عَلَيْهِ وَإِذَا وَقَعَ بِأَرْضٍ وَأَنْتُمْ بِهَا فَلاَ تَخْرُجُوا فِرَارًا مِنْهُ ‏"‏‏.‏
Narrated `Abdullah bin 'Amir:`Umar went to Sham and when he reached Sargh, he got the news that an epidemic (of plague) had broken out in Sham. `Abdur-Rahman bin `Auf told him that Allah's Messenger (ﷺ) said, "If you hear that it (plague) has broken out in a land, do not go to it; but if it breaks out in a land where you are present, do not go out escaping from it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 76 · Medicine

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।