सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 5683

नंबर 5683किताब 76, नंबर 6
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ الْغَسِيلِ، عَنْ عَاصِمِ بْنِ عُمَرَ بْنِ قَتَادَةَ، قَالَ سَمِعْتُ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ إِنْ كَانَ فِي شَىْءٍ مِنْ أَدْوِيَتِكُمْ ـ أَوْ يَكُونُ فِي شَىْءٍ مِنْ أَدْوِيَتِكُمْ ـ خَيْرٌ فَفِي شَرْطَةِ مِحْجَمٍ، أَوْ شَرْبَةِ عَسَلٍ، أَوْ لَذْعَةٍ بِنَارٍ تُوَافِقُ الدَّاءَ، وَمَا أُحِبُّ أَنْ أَكْتَوِيَ ‏"‏‏.‏
Narrated Jabir bin `Abdullah:I heard the Prophet (ﷺ) saying, "If there is any healing in your medicines, then it is in cupping, a gulp of honey or branding with fire (cauterization) that suits the ailment, but I don't like to be (cauterized) branded with fire

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 76 · Medicine

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।