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सहीह बुख़ारी

नंबर 5657

नंबर 5657किताब 75, नंबर 17
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ ثَابِتٍ، عَنْ أَنَسٍ ـ رضى الله عنه ـ أَنَّ غُلاَمًا، لِيَهُودَ كَانَ يَخْدُمُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم فَمَرِضَ‏.‏ فَأَتَاهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَعُودُهُ فَقَالَ ‏ "‏ أَسْلِمْ ‏"‏‏.‏ فَأَسْلَمَ‏.‏ وَقَالَ سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ عَنْ أَبِيهِ، لَمَّا حُضِرَ أَبُو طَالِبٍ جَاءَهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated Anas:A Jewish boy used to serve the Prophet (ﷺ) and became ill. The Prophet (ﷺ) went to pay him a visit and said to him, "Embrace Islam," and he did embrace Islam. Al-Musaiyab said: When Abu Talib was on his deathbed, the Prophet (ﷺ) visited him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 75 · Patients

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।