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सहीह बुख़ारी

नंबर 5653

नंबर 5653किताब 75, नंबर 13
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ، حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، قَالَ حَدَّثَنِي ابْنُ الْهَادِ، عَنْ عَمْرٍو، مَوْلَى الْمُطَّلِبِ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ قَالَ إِذَا ابْتَلَيْتُ عَبْدِي بِحَبِيبَتَيْهِ فَصَبَرَ عَوَّضْتُهُ مِنْهُمَا الْجَنَّةَ ‏"‏‏.‏ يُرِيدُ عَيْنَيْهِ‏.‏ تَابَعَهُ أَشْعَثُ بْنُ جَابِرٍ وَأَبُو ظِلاَلٍ عَنْ أَنَسٍ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated Anas bin Malik:I heard Allah's Messenger (ﷺ) saying, "Allah said, 'If I deprive my slave of his two beloved things (i.e., his eyes) and he remains patient, I will let him enter Paradise in compensation for them

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 75 · Patients

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।