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सहीह बुख़ारी

नंबर 5640

नंबर 5640किताब 75, नंबर 1
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ الْحَكَمُ بْنُ نَافِعٍ، أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، قَالَ أَخْبَرَنِي عُرْوَةُ بْنُ الزُّبَيْرِ، أَنَّ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ زَوْجَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَتْ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَا مِنْ مُصِيبَةٍ تُصِيبُ الْمُسْلِمَ إِلاَّ كَفَّرَ اللَّهُ بِهَا عَنْهُ، حَتَّى الشَّوْكَةِ يُشَاكُهَا ‏"‏‏.‏
Narrated `Aisha:(the wife of the Prophet) Allah's Messenger (ﷺ) said, "No calamity befalls a Muslim but that Allah expiates some of his sins because of it, even though it were the prick he receives from a thorn

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 75 · Patients

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।