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सहीह बुख़ारी

नंबर 5507

नंबर 5507किताब 72, नंबर 33
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا أُسَامَةُ بْنُ حَفْصٍ الْمَدَنِيُّ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ أَنَّ قَوْمًا، قَالُوا لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم إِنَّ قَوْمًا يَأْتُونَا بِاللَّحْمِ لاَ نَدْرِي أَذُكِرَ اسْمُ اللَّهِ عَلَيْهِ أَمْ لاَ فَقَالَ ‏ "‏ سَمُّوا عَلَيْهِ أَنْتُمْ وَكُلُوهُ ‏"‏‏.‏ قَالَتْ وَكَانُوا حَدِيثِي عَهْدٍ بِالْكُفْرِ‏.‏ تَابَعَهُ عَلِيٌّ عَنِ الدَّرَاوَرْدِيِّ‏.‏ وَتَابَعَهُ أَبُو خَالِدٍ وَالطُّفَاوِيُّ‏.‏
Narrated `Aisha:A group of people said to the Prophet, "Some people bring us meat and we do not know whether they have mentioned Allah's Name or not on slaughtering the animal." He said, "Mention Allah's Name on it and eat." Those people had embraced Islam recently

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 72 · Hunting, Slaughtering

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।