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सहीह बुख़ारी

नंबर 5397

नंबर 5397किताब 70, नंबर 25
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَدِيِّ بْنِ ثَابِتٍ، عَنْ أَبِي حَازِمٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَجُلاً، كَانَ يَأْكُلُ أَكْلاً كَثِيرًا، فَأَسْلَمَ فَكَانَ يَأْكُلُ أَكْلاً قَلِيلاً، فَذُكِرَ ذَلِكَ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ إِنَّ الْمُؤْمِنَ يَأْكُلُ فِي مِعًى وَاحِدٍ، وَالْكَافِرَ يَأْكُلُ فِي سَبْعَةِ أَمْعَاءٍ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira:A man used to eat much, but when he embraced Islam, he started eating less. That was mentioned to the Prophet (ﷺ) who then said, "A believer eats in one intestine (is satisfied with a little food) and a Kafir eats in seven intestines (eats much)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 70 · Food, Meals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।