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सहीह बुख़ारी

नंबर 5351

नंबर 5351किताब 69, नंबर 1
حَدَّثَنَا آدَمُ بْنُ أَبِي إِيَاسٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَدِيِّ بْنِ ثَابِتٍ، قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ يَزِيدَ الأَنْصَارِيَّ، عَنْ أَبِي مَسْعُودٍ الأَنْصَارِيِّ، فَقُلْتُ عَنِ النَّبِيِّ فَقَالَ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِذَا أَنْفَقَ الْمُسْلِمُ نَفَقَةً عَلَى أَهْلِهِ وَهْوَ يَحْتَسِبُهَا، كَانَتْ لَهُ صَدَقَةً ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Mas`ud Al-Ansari:The Prophet (ﷺ) said, "When a Muslim spends something on his family intending to receive Allah's reward it is regarded as Sadaqa for him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 69 · Supporting the Family

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।