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सहीह बुख़ारी

नंबर 5263

नंबर 5263किताब 68, नंबर 13
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ إِسْمَاعِيلَ، حَدَّثَنَا عَامِرٌ، عَنْ مَسْرُوقٍ، قَالَ سَأَلْتُ عَائِشَةَ عَنِ الْخِيَرَةِ،، فَقَالَتْ خَيَّرَنَا النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم أَفَكَانَ طَلاَقًا قَالَ مَسْرُوقٌ لاَ أُبَالِي أَخَيَّرْتُهَا وَاحِدَةً أَوْ مِائَةً بَعْدَ أَنْ تَخْتَارَنِي‏.‏
Narrated Masruq:I asked `Aisha about the option: She said, "The Prophet (ﷺ) gave us the option. Do you think that option was considered as a divorce?" I said, "It matters little to me if I give my wife the option once or a hundred times after she has chosen me

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 68 · Divorce

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।