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सहीह बुख़ारी

नंबर 5212

नंबर 5212किताब 67, नंबर 145
حَدَّثَنَا مَالِكُ بْنُ إِسْمَاعِيلُ، حَدَّثَنَا زُهَيْرٌ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ سَوْدَةَ بِنْتَ زَمْعَةَ، وَهَبَتْ، يَوْمَهَا لِعَائِشَةَ، وَكَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَقْسِمُ لِعَائِشَةَ بِيَوْمِهَا وَيَوْمِ سَوْدَةَ‏.‏
Narrated `Aisha:Sauda bint Zam`a gave up her turn to me (`Aisha), and so the Prophet (ﷺ) used to give me (`Aisha) both my day and the day of Sauda

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 67 · Wedlock, Marriage (Nikaah)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।