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सहीह बुख़ारी

नंबर 5156

नंबर 5156किताब 67, नंबर 91
حَدَّثَنَا فَرْوَةُ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ تَزَوَّجَنِي النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَأَتَتْنِي أُمِّي فَأَدْخَلَتْنِي الدَّارَ، فَإِذَا نِسْوَةٌ مِنَ الأَنْصَارِ فِي الْبَيْتِ فَقُلْنَ عَلَى الْخَيْرِ وَالْبَرَكَةِ، وَعَلَى خَيْرِ طَائِرٍ‏.‏
Narrated `Aisha:When the Prophet (ﷺ) married me, my mother came to me and made me enter the house where I saw some women from the Ansar who said, "May you prosper and have blessings and have good omen

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 67 · Wedlock, Marriage (Nikaah)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।