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सहीह बुख़ारी

नंबर 5136

नंबर 5136किताब 67, नंबर 72
حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ فَضَالَةَ، حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ يَحْيَى، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ، حَدَّثَهُمْ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ لاَ تُنْكَحُ الأَيِّمُ حَتَّى تُسْتَأْمَرَ وَلاَ تُنْكَحُ الْبِكْرُ حَتَّى تُسْتَأْذَنَ ‏"‏‏.‏ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ وَكَيْفَ إِذْنُهَا قَالَ ‏"‏ أَنْ تَسْكُتَ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Huraira:The Prophet (ﷺ) said, "A matron should not be given in marriage except after consulting her; and a virgin should not be given in marriage except after her permission." The people asked, "O Allah's Messenger (ﷺ)! How can we know her permission?" He said, "Her silence (indicates her permission)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 67 · Wedlock, Marriage (Nikaah)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।