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सहीह बुख़ारी

नंबर 5056

नंबर 5056किताब 66, नंबर 81
حَدَّثَنَا قَيْسُ بْنُ حَفْصٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَبِيدَةَ السَّلْمَانِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ قَالَ لِي النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ اقْرَأْ عَلَىَّ ‏"‏‏.‏ قُلْتُ أَقْرَأُ عَلَيْكَ وَعَلَيْكَ أُنْزِلَ قَالَ ‏"‏ إِنِّي أُحِبُّ أَنْ أَسْمَعَهُ مِنْ غَيْرِي ‏"‏‏.‏
Narrated `Abdullah bin Masud:The Prophet (ﷺ) said to me, "Recite Qur'an to me." I said to him. "Shall I recite (it) to you while it has been revealed to you?" He said, "I like to hear it from another person

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 66 · Virtues of the Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।