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सहीह बुख़ारी

नंबर 5042

नंबर 5042किताब 66, नंबर 66
حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ آدَمَ، أَخْبَرَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ، أَخْبَرَنَا هِشَامٌ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ سَمِعَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم قَارِئًا يَقْرَأُ مِنَ اللَّيْلِ فِي الْمَسْجِدِ فَقَالَ ‏ "‏ يَرْحَمُهُ اللَّهُ لَقَدْ أَذْكَرَنِي كَذَا وَكَذَا آيَةً، أَسْقَطْتُهَا مِنْ سُورَةِ كَذَا وَكَذَا ‏"‏‏.‏
Narrated `Aisha:The Prophet (ﷺ) heard a reciter reciting, the Qur'an in the mosque at night. The Prophet (ﷺ) said, "May Allah bestow His Mercy on him, as he has remind ed me of such-and-such Verses of such and-such Suras, which I missed

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 66 · Virtues of the Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।