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सहीह बुख़ारी

नंबर 5040

नंबर 5040किताब 66, नंबर 64
حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ حَفْصٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، قَالَ حَدَّثَنِي إِبْرَاهِيمُ، عَنْ عَلْقَمَةَ، وَعَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَزِيدَ، عَنْ أَبِي مَسْعُودٍ الأَنْصَارِيِّ، قَالَ قَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ الآيَتَانِ مِنْ آخِرِ سُورَةِ الْبَقَرَةِ مَنْ قَرَأَ بِهِمَا فِي لَيْلَةٍ كَفَتَاهُ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Mas`ud al-Ansari:The Prophet (ﷺ) said, "If one recites the last two verses of Surat al-Baqarah at night, it is sufficient for him (for that night)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 66 · Virtues of the Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।