حَدَّثَنَا حَجَّاجُ بْنُ مِنْهَالٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، قَالَ أَخْبَرَنِي عَلْقَمَةُ بْنُ مَرْثَدٍ، سَمِعْتُ سَعْدَ بْنَ عُبَيْدَةَ، عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ السُّلَمِيِّ، عَنْ عُثْمَانَ ـ رضى الله عنه ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ " خَيْرُكُمْ مَنْ تَعَلَّمَ الْقُرْآنَ وَعَلَّمَهُ ". قَالَ وَأَقْرَأَ أَبُو عَبْدِ الرَّحْمَنِ فِي إِمْرَةِ عُثْمَانَ حَتَّى كَانَ الْحَجَّاجُ، قَالَ وَذَاكَ الَّذِي أَقْعَدَنِي مَقْعَدِي هَذَا.
Narrated `Uthman:The Prophet (ﷺ) said, "The best among you (Muslims) are those who learn the Qur'an and teach it
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।