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सहीह बुख़ारी

नंबर 5019

नंबर 5019किताब 66, नंबर 41
حَدَّثَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ رُفَيْعٍ، قَالَ دَخَلْتُ أَنَا وَشَدَّادُ بْنُ مَعْقِلٍ، عَلَى ابْنِ عَبَّاسٍ رضى الله عنهما فَقَالَ لَهُ شَدَّادُ بْنُ مَعْقِلٍ أَتَرَكَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم مِنْ شَىْءٍ قَالَ مَا تَرَكَ إِلاَّ مَا بَيْنَ الدَّفَّتَيْنِ‏.‏ قَالَ وَدَخَلْنَا عَلَى مُحَمَّدِ ابْنِ الْحَنَفِيَّةِ فَسَأَلْنَاهُ فَقَالَ مَا تَرَكَ إِلاَّ مَا بَيْنَ الدَّفَّتَيْنِ‏.‏
अब्दुल अज़ीज़ बिन रुफ़ै कहते हैं कि मैं तथा शद्दाद बिन माक़िल अब्दुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हुमा) के पास आए और शद्दाद बिन माक़िल ने उनसे पूछा : क्या नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने (आप लोगों के लिए) कुछ छोड़ा है? उन्होंने उत्तर दिया : आपने उसके सिवा कुछ नहीं छोड़ा, जो दो दफ़्तियों के बीच है। वह आगे कहते हैं : हम मुहम्मद बिन हनफ़िया के पास पहुँचे और उनसे पूछा, तो उन्होंने भी कहा : आपने उसके सिवा कुछ नहीं छोड़ा, जो दो दफ़्तियों के बीच है।

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 66 · Virtues of the Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।