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सहीह बुख़ारी

नंबर 5013

नंबर 5013किताब 66, नंबर 35
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ، أَخْبَرَنَا مَالِكٌ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي صَعْصَعَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، أَنَّ رَجُلاً، سَمِعَ رَجُلاً، يَقْرَأُ ‏{‏قُلْ هُوَ اللَّهُ أَحَدٌ‏}‏ يُرَدِّدُهَا فَلَمَّا أَصْبَحَ جَاءَ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَذَكَرَ ذَلِكَ لَهُ وَكَأَنَّ الرَّجُلَ يَتَقَالُّهَا فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ وَالَّذِي نَفْسِي بِيَدِهِ إِنَّهَا لَتَعْدِلُ ثُلُثَ الْقُرْآنِ ‏"‏‏.‏
तथा अबू सईद खुदरी -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है, वह कहते हैं : एक व्यक्ति ने एक अन्य व्यक्ति को "क़ुल हुवल्लाहु अहद" पढ़ते हुए सुना, जो उसे बार-बार दोहराए जा रहा था। सुबह हुई तो वह अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- के पास पहुँचा और इसके बारे में बताया। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वह इसे कम समझ रहा है। अतः अल्लाह के रसूल -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : "उसकी क़सम जिसके हाथ में मेरी जान है, यह सूरा एक तिहाई क़ुरान के समान है।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 66 · Virtues of the Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।