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सहीह बुख़ारी

नंबर 5003

नंबर 5003किताब 66, नंबर 25
حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ، حَدَّثَنَا هَمَّامٌ، حَدَّثَنَا قَتَادَةُ، قَالَ سَأَلْتُ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه ـ مَنْ جَمَعَ الْقُرْآنَ عَلَى عَهْدِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ أَرْبَعَةٌ كُلُّهُمْ مِنَ الأَنْصَارِ أُبَىُّ بْنُ كَعْبٍ وَمُعَاذُ بْنُ جَبَلٍ، وَزَيْدُ بْنُ ثَابِتٍ، وَأَبُو زَيْدٍ‏.‏ تَابَعَهُ الْفَضْلُ عَنْ حُسَيْنِ بْنِ وَاقِدٍ عَنْ ثُمَامَةَ عَنْ أَنَسٍ‏.‏
Narrated Qatada:I asked Anas bin Malik: "Who collected the Qur'an at the time of the Prophet (ﷺ) ?" He replied, "Four, all of whom were from the Ansar: Ubai bin Ka`b, Mu`adh bin Jabal, Zaid bin Thabit and Abu Zaid

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 66 · Virtues of the Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।