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सहीह बुख़ारी

नंबर 4964

नंबर 4964किताब 65, नंबर 486
حَدَّثَنَا آدَمُ، حَدَّثَنَا شَيْبَانُ، حَدَّثَنَا قَتَادَةُ، عَنْ أَنَسٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ لَمَّا عُرِجَ بِالنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم إِلَى السَّمَاءِ قَالَ ‏ "‏ أَتَيْتُ عَلَى نَهَرٍ حَافَتَاهُ قِبَابُ اللُّؤْلُؤِ مُجَوَّفًا فَقُلْتُ مَا هَذَا يَا جِبْرِيلُ قَالَ هَذَا الْكَوْثَرُ ‏"‏‏.‏
Narrated Anas:When the Prophet (ﷺ) was made to ascend to the Heavens, he said (after his return), "I came upon a river the banks of which were made of tents of hollow pearls. I asked Gabriel. What is this (river?) He replied, 'This is the Kauthar

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 65 · Prophetic Commentary on the Qur'an (Tafseer of the Prophet (pbuh))

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।